Bachcho ke Liye Sex Education Kyo Jaruri Hai : बच्चों को सेक्स एजुकेशन कब और किस उम्र मे देना जरूरी है।

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हमारे देश में सेक्स का नाम किसी के मुंह से अगर निकल भी जाए तो, उसे लोग एक अलग ही नजर से देखते है, कि पता नहीं इसने क्या जुल्म कर दिया हो, यही कारण है, कि देश के अंदर सेक्स को लेकर और अलग प्रकार का भ्रम बना रहता है। लोग इसके बारे में बात करना भी चाहते है लेकिन किसी डर की वजह से उनके सवाल अंदर ही दबे रह जाते है।

बच्चों के मामलों में यह समस्या बड़ी ही परेशान करने वाली है। बच्चों को सेक्स के बारे में खुद समझने और दुसरो से इसके बारे में समझने में परेशानी होती है। बड़े लोग बच्चों के सामने इस प्रकार के मुद्दे उठाने से परहेज करते है, क्योंकि देश में यह रिवाज बरसों से चला आ रहा है।जिसका नतीजा यह होता है, कि जब बच्चों को अचानक से सेक्स के बारे में कही से टूटी फूटी भ्रमक जानकारी मिलती है, तो उनके मन में सेक्स को लेकर एक अलग ही भावना बन जाती है जिसके कुछ गलत परिणाम होते है।

इस लेख में हम आपको सेक्स के इसी मुद्दे से जुड़े हुए कुछ गंभीर तथ्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देने वाले है ताकि बच्चों को इसके गलत परिणाम न भुगतने पड़े। इसलिए अगर आप विधार्थी है या माता पिता है तो आपको यह लेख को जरूर पढ़ना चाहिए ताकि आप अपने बच्चों को मेंटली स्ट्रॉंग बना सको।

इस लेख में हमें जानेंगे कि सेक्स एजुकेशन क्या है, Sex Education Kya Hai, बच्चों को सेक्स एजुकेशन कैसे दे। Bachcho ko Sex Education Kaise de Sex Education बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना क्यों जरूरी है। Sex Education Kyo Jaruri Hai

Sex Education

बदलते हुए समय के अनुसार आज भी कुछ ऐसे सवालो के जवाब तलाश रहे है। जिनके बारे में हमें बात करना तो जरूरी है, लेकिन किसी डर की वजह से हम उन्हे पूछने से डरते है, कि सामने को ये ना लगे कि पता नहीं आपने उनसे क्या पूछ लिया हो।  भारत के स्कूलों में भी सेक्स जैसे गंभीर विषयों से जुड़े हुए चेपटर या पाठ्यक्रम को नहीं पढ़ाया जाता है।  क्योंकि टीचर्स को भी इन विषयों को पढ़ाने में बच्चों के सामने शर्म महसूस होती है।  

लोगों को अब इसके बारे में थोड़ा अलग प्रकार से सोचने की जरूरत है, ताकि बच्चों को इस विषय के बारे में सही समय पर जानकारी देकर भ्रमक जानकारी से बचाया जा सके।  बदलते हुए समय के अनुसार अब लोगों को अपनी सोच भी बदलनी चाहिए।  

Sex Education का मतलब यह नहीं है, कि आप बच्चों को कम आयु में ही सेक्स करने के तरीकों के बारे में समझाये कि सेक्स कैसे परफ़ॉर्म किया जाता है।  अगर आपकी यही सोच है, तो इसका मतलब है कि आपको भी सेक्स के बारे में अधूरी जानकारी है। 

देश के ज्यादातर माता पिता को सेक्स का केवल वही मतलब पता होता है, इसलिए बच्चों के सामने इस टॉपिक पर खुलकर बात करने से झिझकते है। 

सेक्स एजुकेशन क्या है Sex Education Kya Hai

जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है सेक्स एजुकेशन का मतलब बच्चों की आयु के हिसाब से अलग होता है। बदलते हुई आयु के हिसाब से मेल , फीमेल बच्चों में उनकी बॉडी के हिसाब से बदलाव होते रहते है। जिनके बारे में बच्चों को पहले से ही अवगत कराना जरूरी है.  ताकि जब भी उनकी शारीरिक बॉडी के इस प्रकार का कोई बदलाव हो तो, वे उसे समझ सके। 

इसे और भी साधारण भाषा में समझते है। जब भी आयु के अनुसार बच्चों में बदलाव होते है तो वे इसके बारे में अपनी आयु से कुछ ही बड़े लोगों बच्चों के सामने डिस्कस करते है। जबकि उनके पास भी इसकी जानकारी नहीं होती है। वे कही से टूटी फूटी जानकारी प्राप्त करके आपको बता देते है जिस प्रकार आप यकीन कर लेते हो जबकि उन बातों का असल सच्चाई से से कोई मौल नही है जिसका गलत असर बच्चों के जीवन पर होता है। 

बच्चों को उनकी आयु के हिसाब से होने वाले शारीरिक बदलाव , बॉडी पार्ट्स , गुड टच , बैड टच के बारे में अच्छे से जरूर समझना चाहिए। 

वैसे अब सेक्स से जुड़ी हुई कुछ बाते बच्चों के कोर्स में भी पढ़ाई जाती है, लेकिन उन बातों को असल जिंदगी में कैसे इम्प्लीमेंट किया जाता है ये कोई  नहीं समझाता है।   

सेक्स एजुकेशन क्यों जरूरी है Sex Education Kyo Jaruri Hai

सेक्स एजुकेशन Sex Education से जुड़े हुए मुद्दों को लेकर जब कुछ मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमें इसके बारे में बच्चों को समझाने के लिए सबसे पहले यह समझना होगा, कि जिस तरह से हम अपने जीवन में खासी, बुखार, के बारे में खुलकर बात करते है।  दूसरे से इनसे जुड़े हुए सवाल जवाब पूछते है।  ठीक उसी प्रकार सेक्स भी एक आम शब्द है। 

आज के समय में बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसकी उपयोगिता बच्चों का  मानसिक संतुलन बनाने के लिए आज भी जरूरी है और आने वाले भविष्य में भी होगी। 

 सेक्स एजुकेशन के बारे में जो बाते बच्चों को किसी स्कूल या अपने घर के किसी बड़े से पता लगनी चाहिए।  वह बाते अगर उन्हे किसी गलत प्लेटफ़ॉर्म, जैसे कि इंटरनेट पर एडल्ट फिल्मों को देखकर या किसी गलत आदमी से पता चलती है, तो ये बच्चों के खिलाफ चली जाती है।  जिसका असर उनके दिमाग पर भी होता है। 

इसलिए सही समय पर बच्चों पर इस विषय के बारे में जरूर शिक्षा देनी चाहिए। यह ठीक उसी तरह है।  जैसे पहले बच्चों को चलना सिखाया जाता है, फिर साइकिल चलाना , फिर बाइक या कार चलाना

बच्चों को किस आयु में में क्या समझाए

बचपन का पहला पड़ाव ( तीन से पाँच वर्ष की आयु )

इस आयु के बच्चे ज्यादा सवाल जवाब नहीं करते है।  उन्हे माता पिता जो भी बातें प्यार से समझाते है।  वो उन्हे आराम से मान जाते है इस आयु के बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना बेहद आसान है। 

इस आयु में बच्चों को सेक्स एजुकेशन के बारे में समझाने के लिए उन्हें शरीर के सभी अंगों के बारे में अच्छे से समझाइए इसके अलावा उन्हें यह  भी समझाए, कि अगर आपके पेरेंट्स के अलावा कोई भी दूसरा शकस अगर उनके किसी अंग को छूता है तो उन्हें इसके बारे में घर में बताना चाहिए। 

उन्हे गुड टच और बेड टच के बारे में समझाएं इससे आपके बच्चे गलत नियत रखने वालों की आसानी से पहचान कर सकते है। 

बचपन का दूसरा पड़ाव (6 से 8 वर्ष की आयु)

इस आयु के के बच्चे भी अपने माता पिता  की बातों को आसानी से मान लेते है लेकिन आप उन्हें जो समझाते है वो उसको लेकर सवाल  भी पूछ सकते है लेकिन आपको ऐसे में आपको उनके जवाब घबराकर नहीं देने चाहिए न ही उन्हें डाटना चाहिए।

सवाल सुनने के बाद उन्हें इसके बारे में आराम से समझाएं ताकि वे समझ सके। इस आयु में उन्हें बॉडी पार्ट्स के बारे में बताते हुए उनके काम के बारे में भी समझाए।

सेक्स एजुकेशन के बारे में आप अपने बच्चों से जितनी सरलता से बात करेंगे आपके बच्चे बिना झिझके आपसे सवाल जवाब पूछेंगे।

बचपन का आखिरी पड़ाव (आयु 9 से 11 वर्ष तक की )

आजकल के इस आयु के बच्चों को अगर आप Sex Education से जुड़े विषयों से को नहीं समझाते है वो वही न गलत सोर्स से इसकी जानकारी प्राप्त कर लेते है। जो एक उनके जीवन में एक भ्रामक पैदा करती है।  इसलिए इस आयु के बच्चों को सेक्स के बारे में सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। 

इस आयु के बच्चों को सेक्सुअल एक्टिविटी और सेक्स हाइजीन के बारे में भी समझाए , पहले उसे सेक्स के बारे में पूछे ताकि अगर उन्होंने कही से भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त की है तो आप  उनके द्वारा सुनी गई गलत बातों को सही तरीके से समझा सको।

अगर बच्चों को आप उनके मन में उठने वाले सेक्स से जुड़े हुए सवालों के बारे में बारे में नहीं समझाते है तो वे परेशान रहते है। टीवी पर कंडोम , सेनेटरी पैड इत्यादि के विज्ञापन देखकर भी उन्हें इसके बारे में समझाए।   

टीनऐज में प्रवेश ( 12 वर्ष से 16 वर्ष तक की आयु )

इस आयु में आते आते बच्चों के हार्मोन पूरी तरह से बदलते चले जाते है उनकी शारीरिक बॉडी में बदलाव होने लगते है बच्चों में दूसरे जेंडर को लेकर सेक्स की इच्छा पनपने लगती है। 

जिसके कारण बच्चों में सेक्स की इच्छा को लेकर , नाइफाल , पिरियड्स जैसी घटनाए होने लगती है इस समय में दोनों जेंडर के बच्चों को इसके बारे में सही तरीके से समझना जरूरी है ताकि वे एक दूसरे की भावना का सम्मान कर सके। 

 कुछ गलत कदम उठाने से बच सके लड़कियों में पिरियड्स और लड़कों में  नाइटफाल को लेकर जानकारी नहीं होती  है वो इससे घबरा जाते है।  इसलिए इनके बारे में सही समय पर बच्चों को समझाना जरूरी है कि यह क्यों होता है , किसलिए होता है , आपको इससे किस प्रकार बचना है।  

स्कूलों में यौन शिक्षा देने के कुछ प्रमुख कारण 

  • देश के अंदर Sex Education देना का एक बड़ा कारण यह भी है, कि अगर आपने बच्चों को सेक्स के बारे में शिक्षा नहीं देते है, तो उन्हे कही न कही से इस विषय के बारे में पता चल ही जाता है, लेकिन उन्हे जो सेक्स बारे  में जो पता चलता है।  वो उनकी आयु के हिसाब से सही जानकारी नहीं होती है.  जिसके कारण वे बड़ी बड़ी गलतिया कर देते है।
  • आज के समय में बच्चों से लेकर बड़ों तक मोबाइल सबके के हाथ में होता है।  जब मोबाइल चलाए तो यूट्यूब या गूगल ओपन न करे ऐसा हो नहीं सकता है।  इन प्लेटफ़ॉर्म पर हर मिनट सेंकड़स एडल्ट ऐड भी चलते रहते है।  जिसके कारण अगर बच्चे इन प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करते है, तो उनके सामने नग्नता अश्लीलता से जुड़े हुए वीडियो आने लगते है।  
  • जिनमें सेक्स परफॉर्म्स करते हुए भी दिखाया जाता है.  जिसके कारण बच्चों में विज्ञापन देखने के बाद  अपोजिट जेंडर के साथ उसी एक्टिविटी को करने की इच्छा जागने लगती है। जिसके कारण बच्चे कई बार जबरदस्ती भी अपोजिट जेंडर के साथ उसी एक्टिविटी को करते है जिससे देश के अंदर कम आयु में  ही बच्चे रेप दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे है।  
  • अगर बच्चों को सही समय पर सेक्स एजुकेशन और उससे होने वाले नुकसान के बारे में अच्छे तरीके से समझाएंगे, तो इससे बच्चे गलत रास्ते पर जाने से भी बचेंगे और उनका दिमाग भी विकसित होगा। 
  • सही समय पर सेक्स एजुकेशन न मिलने के कारण देश के अंदर बच्चे कम आयु में ही गलत जानकारी होने के कारण सेक्स परफ़ॉर्म करने के बारे में सोचकर उसे अंजाम तक देते है।  जिससे उन्हे कुछ समय के लिए तो आनंद मिलता है, लेकिन उसके कुछ गलत परिणाम भी भुगतने पड़ते है.  जैसे लड़कियों में कम आयु में ही प्रेग्नेंसी होना , लड़कों को मास्टरबेशन की लत लग जाना इत्यादि 

यौन शिक्षा देने के टिप्स

इन सभी बातों के जानने के बाद अब बात आती है,  कि स्कूल कॉलिजों  या घरों में सेक्स एजुकेशन जैसे मुद्दे के बारे में कैसे शिक्षा देनी चाहिए।  अब ये तो नही होगा कि, आप सभी कामों को छोड़कर केवल एकदम से इस विषय पर ही बाते करने लगे।  

सरकार को इस विषय के बारे में सबसे पहले यह कदम उठाना चाहिए कि उन्हे सेक्स एजुकेशन को सभी स्कूलों म,ए अनिवार्य कर देना चाहिए। इससे बच्चों और बड़ों में इस विषय को लेकर एक तालमेल बनेगा फिर बच्चे भी इस विषय पर टीचर्स और अपने परिवार वाले से इस विषय में खुलकर बात कर पाएंगे।  

सेक्स एजुकेशन की शिक्षा देते समय बच्चों के पाठ्यक्रम में अपोजिट जेंडर को देखकर होने वाले वाले बदलाव , जोखिम भरे शारीरिक व्यवहार से निपटने के तरीकों के बारे में भी बताना चाहिए जैसे कि शारीरिक शोषण, गर्भधारण ,जबरन यौन संबंध बनाने जैसे टॉपिक शामिल है। ये ऐसे विषय है जिनके बारे में आजकल के बच्चों को जरूरी शिक्षा देनी चाहिए।  

लेख में आपने क्या सीखा 

इस लेख में हमने आपको सेक्स एजुकेशन के बारे में विस्तार से समझाया है, कि आज के समय में अपने बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना क्यों जरूरी हो गया है। जिसके बारे में कोई भी इंसान खुलकर बात नहीं करना चाहता है, फिर चाहे आपके माता पिता हो या टीचर्स 

जिसका हमें या समाज को गलत परिणाम भुगतने पड़ते है।  इस लेख में हमने आपको बताया है कि सेक्स एजुकेशन क्या है, Sex Education Kya Hai, बच्चों को सेक्स एजुकेशन कैसे दे। Bachcho ko Sex Education Kaise de Sex Education बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना क्यों जरूरी है। Sex Education Kyo Jaruri Hai

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