Psychologist Kaise Bane Hindi : 12वीं के बाद हैं साइकॉलजी मे करियर बनाने के शानदार मौके

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Psychologist Kaise Bane by ultimateguider

वर्तमान समय मे तनाव हर व्यक्ति के जीवन का हिसा बन चुका है । जिसके कारण नई नई बीमारियों का जन्म हो रहा है।

तनाव के कारण रिश्तों मे खटास रहती है। लड़ाई झगड़े रहते है। तो कई बार काम पर जाने का मन नहीं करता ।तनाव के कारण इंसान अकेला रहना पसंद करता है । वो अपने अंदर की ख़ुशी को भूल चूका होता है।

जिसके कारण मानव शरीर मे नए नए प्रकार की बीमारिया जन्म ले रही है। इस प्रकार की समस्याओ को हल करने मे साइकोलॉजिस्ट हमारी मदद करते है। जिसके कारण साइकोलॉजिस्ट की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।

इस लेख मे हम आपको बताने वाले है कि साइकोलॉजिस्ट कैसे बने psychologist kaise bane ? या साइकोलॉजी में करियर कैसे बनाये psychology me career kaise banaye ? psychology courses kaise kare

मानसिक बीमारी के आंकड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 6% से अधिक जनसंख्या किसी न किसी रूप में मानसिक समस्या में विलुप्त है। देश की इतनी बड़ी आबादी का मानसिक रूप से बीमार रहना एक बहुत बड़ी समस्या है।

जिसके कारण इंसान कुछ खास तरक्की नहीं कर पाता है। वह लगातार तनाव में रहता है, उसे हर चीज मैं उलझने नजर आती है, लेकिन ऐसे में जिस किसी को भी यह समस्या रहती है। उसका किसी को एहसास तक नहीं है लेकिन यही समस्या धीरे-धीरे एक दिन बड़ा रूप ले लेती है |

देश मे मानसिक समस्या

भारत देश में मानसिक समस्या को बहुत हल्के में लिया जाता है। इसका एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि देश में मनोचिकित्सको की बहुत बड़ी कमी है।

इस बीमारी को लेकर देश के लोग जागरूक नहीं है और ना ही यहां पर इसे कोई जागरूक करने वाला है,ताकि समय के रहते बीमारी का इलाज किया जा सके।

कोई भी बीमारी मनुष्य के अंदर धीरे धीरे ही जन्म लेती है। लकिन अगर उस बीमारी पर ध्यान न देकर उसे अनदेखा कर दिया जाए तो, वही बीमारी एक दिन बड़ा रूप धारण करके मनुष्य की जान तक ले सकती है।

तनाव ऐसी समस्या है, जो धीरे धीरे मनुष्य के अंदर जन्म लेकर उसे अंदर से खोखला करती रहती है, लेकिन इस समस्या को ज्यादातर इंसान हल्के में लेते। इसलिए वो समय पर उसका इलाज नहीं कराते है।

उन्हें ये समस्या हल्की लगती है। इसका पता तब चलता है जब आप तनाव से सम्बन्धित किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित हो चुके होते है। तनाव की समस्या का सीधा सम्बन्ध मनुष्य के दिल से है।

साइकॉलजी की पढ़ाई क्या है

साइकॉलजी में इंसान के मस्तिष्क से संबंधित परेशानियों का इलाज किया जाता है। साइकॉलॉजिस्ट का काम इंसान के दिमाग को पढ़कर उसके मन में चल रही समस्याओं को खत्म करना होता है।

अधितकर छात्रों को यह अलग हटकर कोर्स लगता है इसलिए कई छात्र इसे अपना करियर चुनते हैं जबकि कई छात्रों को मानव व्यवहार में दिलचस्पी होती है।

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साइकोलॉजिस्ट का काम

इनके उपचार को करने का तरीका दूसरी बीमारियों के इलाज करने के तरीके से काफी अलग होता है, जो मेडिकल साइंस की भांति बिल्कुल अलग होता है।

मानसिक बीमारी को दूर करने के लिए रोगी के व्यवहार यानि सोच समझ और चिंतन की प्रक्रिया में धीरे-धीरे बदलाव किया जाता है। ऐसे में रोगी को ठीक होने में काफी समय लग जाता है।

साइकोलॉजिस्ट मानसिक रूप से ग्रस्त रोगी को सामान्य करने समायोजन सुधारने और खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लाने में काफी मददगार सिद्ध हुए हैं। इसलिए अगर आप मानसिक रूप से ग्रस्त हैं तो आपको मानसिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए ताकि आप किसी बड़ी बीमारी से पीड़ित होने से बच सके।

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योग्यता एवं कोर्स ( Qualification & Course )

साइकोलॉजी कोर्स करने के लिए आपको बारहवीं की परीक्षा में 50 % अंक होना अनिवार्य है तभी आप बीए या बीए इन साइकोलॉजी में प्रवेश ले पाओगे।

इससे आगे आप पीजी साइकोलॉजी में प्रवेश लेना चाहते हो तो आपको ग्रेजुएशन में 55 % अंको के साथ पास होना अनिवार्य है |एमफिल या साइकोलॉजी में पीएचडी करने के लिए भी पोस्ट ग्रेजुएट में 55 % अंक होना अनिवार्य है।

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  • एमए/एमएससी इन साइकोलॉजी (2 वर्ष)
  • पीजी डिप्लोमा इन साइकोलॉजी (2 वर्ष)
  • पीएचडी डिप्लोमा इन साइकोलॉजी

साइकॉलॉजी में पढ़ाये जाने वाले विषय

  1. इट्रोडक्शन कॉउंसलिंग introduction counselling
  2. काउंसलिंग साइकोलॉजी counselling psychology
  3. वोकेशनल गाइडेंस vocational guidance
  4. चाइल्ड साइकोलॉजी Child psychology
  5. बेहेवियर साइंस behavioural science
  6. कॉउंसलिंग प्रोसेस counselling Process
  7. रिसर्च मेथडोलॉजी Research Methodology

साइकोलॉजी में करियर

  1. Psychologist साइकोलॉजी की डिग्री लेने के बाद आपके पास हेल्थ संबंधी समस्याओं से जुड़े जैसे हॉस्पिटल एनजीओ थेरेपी सेंटर काउंसलिंग सेंटर यूनिवर्सिटी स्कूल औद्योगिक इकाइयों इत्यादि में काउंसलर के तौर पर आप अपने केरियर की शुरुआत कर सकते हैं।
  2. इसके अलावा आपको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,रक्षा क्षेत्र ,सोशल वेलफेयर जेलों आदि में भी ऐसे प्रशिक्षित लोग नियुक्त किया जाते हैं। जिन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद किसी भी मानसिक विशेषज्ञ के साथ रहकर कुछ अनुभव लिया हो, ताकि उन्हें रोगियों की पहचान के बारे में सही जानकारी हो क्योंकि बिना परीक्षण लिए आप किसी भी बड़ी जगह अकेले उपचार के लिए नहीं जा सकते।
  3. इसलिए आपका अनुभवी होना जरूरी इसलिए जितना ज्यादा हो सके इस क्षेत्र में अपना अनुभव बढ़ाते रहें।
  4. इस क्षेत्र में किताबी शिक्षा से ज्यादा मानसिक समस्याओं से ग्रस्त यह बुरी आदतों या लत के शिकार लोगों के उपचार के समय सीखा जाता है बाद में आप
  5. इस समस्या से संबंधित अन्य प्रकार के कोर्स करके अपनी पेशेवर योग्यता को बढ़ा सकते हैं उसके बाद आप स्वतंत्र रूप से इस क्षेत्र में पेशेवर के तौर पर अकेले भी कार्य कर सकते हो।
  1. इसे भी जरूर पढे :- मेडिसिन एमआर कैसे बने

टॉप रिक्रूटमेंट कंपनी

  1. एनजीओ
  2. कॉलेज,यूनिवर्सिटी और स्कूल
  3. आउट पेशेंट केयर सेंटर
  4. हॉस्पिटल और क्लिनिक
  5. हेल्थ प्रैक्टिशनर ऑफिस
  6. साइकेट्रिक और रिहैबिलिटेशन सेंटर
  7. इंडिविजुअल और फैमिली सर्विस

Job Designation

  1. मनोवैज्ञानिक टीचर
  2. मनोवैज्ञानिक सलाहकार
  3. करियर काउंसलर
  4. साइकोलॉजिस्ट
  5. मैरिज काउंसलर
  6. चाइल्ड काउंसलर

साइकोलॉजिस्ट की चुनौतियां

किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से ग्रस्त रोगी के उपचार करने के लिए एक अलग चुनौती का सामना करना पड़ता है। जिसमें कभी-कभी रोगी के मस्तिष्क में ज्यादा कमी आ जाने के कारण वह उटपटांग हरकतें करते रहते है। जिसको संतुलन में लाने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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मानसिक रूप से ग्रस्त रोगी की गलत हरकतों के कारण रोगी के परिवार की ओर से उन्हें जल्द ठीक करने की अपेक्षा के कारण थोड़ा दबाव रहता है। अभी तक भारत देश में सरकारी स्तर पर जॉब की बहुत सीमित व्यवस्था है।

प्राइवेट सेक्टर में आपको ज्यादा वेतन नही मिल पाता है इसके लिए आपको थोड़ा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में इस क्षेत्र में आपको अपन ज्यादा वेतन पाने के लिए अपना हॉस्पिटल की शुरुआत करना अपने आप में एक चुनौती है।

दूसरी स्किल Other Skill

  1. शांत और धैर्यवान व्यक्तित्व
  2. समाज कल्याण की भावना
  3. बेहतर संचार की क्षमता
  4. दूसरों की केयरिंग करना
  5. आत्मविश्वास से भरपूर होना
  6. कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होना

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साइकोलॉजी सम्बन्धी कुछ प्रमुख संस्थान

  • जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी ऐंड अलॉइड साइंसेज, नोएडा
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ
  • बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

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लेख मे हमने क्या सीखा

दोस्तों इस लेख में हमने आपको मेडिकल के तेजी से उभरते हुए करियर साइकोलॉजी के बारे में बताया है इस लेख में हमने बताया है कि साइकोलॉजिस्ट कैसे बने psychologist kaise bane ? या साइकोलॉजी में करियर कैसे बनाये psychology me career kaise banaye ? psychology courses kaise kare

अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो आप अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स के माध्यम से बता सकते है लेकिन अगर आपका इस करियर को लेकर किसी प्रकार का कोई भी सवाल है आप कमेंट करके पूछ सकते है और इस जानकारी को दुसरो के साथ भी शेयर करे ताकि उन्हें भी इस महत्वपूर्ण करियर विकल्प के बारे में पता चल सके।

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