IPL Business Model Kya Hai : आईपीएल टीमें हारने के बावजूद भी कैसे अरबों रुपये कमा जाती हैं। समझे आसान भाषा में

IPL Business Model Kya Hai ultimate guider
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अगर आप क्रिकेट में रचते हैं तो आपको आईपीएल के बारें जरूर पता होगा कि कि 2022 का आईपीएल शुरू हों चुका हैं। अब अगले दो महीने तक क्रिकेट में आईपीएल का बोलबाला रहेगा। ग्राउंड पर लोगों को खिलाड़ियों के चौके छक्कों देखने को मिलेंगे तो बीसीसीआई से लेकर टीम मालिकों और खिलाड़ियों पर पैसों की बरसात होगी।

आईपीएल देखने वाले बहुत से लोगों को लगता हैं कि आईपीएल में हारने के बाद भी टीम की कमाई कैसे होती हैं। एक टीम जो आज तक आईपीएल का एक ही खिताब नहीं जीती। वो अब तक कैसे आईपीएल में टिकी हुई हैं। क्या उन्हे हारने के बाद भी पैसा मिलता हैं।

अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं तो इस लेख को एक बार ध्यानपूर्वक पूरा पढ़ें क्योंकि लेख को पढ़ने के बाद आपको आईपीएल बिजनेस मॉडल से जुड़े हुए सभी सवालों के जवाब मिल चुके होंगे। इस लेख में हम बात करेंगे कि आईपीएल बिजनेस मॉडल क्या हैं। IPL Business Model Kya Hai आईपीएल में टीम/खिलाड़ी और बीसीसीआई की कमाई कैसे होती हैं। इत्यादि।

आईपीएल की शुरुआत

टी 20 क्रिकेट की शुरुआत काफी पहले हो चुकी थी। लेकिन क्रिकेट देखने वाले लोगों के मन में टी 20 क्रिकेट देखने को बड़ी दिलचस्पी रहती थी। इसका बड़ा कारण था कि इसमें लोगों को कम समय में ही ग्राउंड पर भरपूर चौके छक्के देखने को मिल जाते हैं। लेकिन टी 20 क्रिकेट के मेच कम ही देखने को मिलते थे।

इसी कमी को पूरा करने के लिए बीसीसीआई ने वर्ष 2008 में आईपीएल की शुरुआत की , जब से आईपीएल की शुरुआत हुई तब से आईपीएल की लोकपिरीता कम नहीं हुई हैं बल्कि पहले से काफी बढ़ चुकी हैं।
आईपीएल की शुरुआत 2008 में दस टीमों के साथ हुई थी। आईपीएल के सीजन चार यानि कि वर्ष 2011 में दो और टीमों को जोड़ा गया कोच्चि टस्कर्स केरल और सहारा पुणे वॉरियर्स,

2016 और 2017 के आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रायल्स को अलग अलग कारणों के चलते बैन होना पड़ा इन टीमों के बैन होने के बाद संतुलन बनाने के लिए
गुजरात लांयस और राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स टीमों को जोड़ा गया। अब फिर से 2022 में आईपीएल में दो टीमों को और जोड़कर टीमों की संख्या आठ के बजाय दस कर दी गई है। 2022 के आईपीएल में लखनऊ और अहमदाबाद टीमों को भी जोड़ा गया हैं।

बिजनेस, एंटरटेनमेंट और स्‍पोर्ट्स को जोड़ने के पीछे गुजरात के ललित मोदी का था। जो आईपीएल के शुरू होने से देश के बिजनेस मेन , बॉलीवुड स्टार और क्रिकेट खिलाड़ियों के बीच अच्छे संबंध बनने लगे।

आईपीएल में हिस्सा लेने वाली टीमें और उनके मालिक

आईपीएल टीम मालिक का नाममालिकों का व्यवसाय
चेन्नई सुपर किंग्स एन श्रीनिवासन चेन्नई सुपर किंग्स क्रिकेट लिमिटेड चैंपियंस
दिल्ली केपिटल पार्थ जिंदल जीएमआर समूह और जेएसडब्ल्यू समूह
पंजाब किंग्सप्रीति जिंटा, नेस वाडिया, बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड
कोलकाता नाइट राइडर्सशाहरुख खान और जूही चावला रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और मेहता ग्रुप
मुंबई इंडियंस मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज
सनराइजर्स हैदराबाद कलानिधि मारानी सनसन टीवी नेटवर्क
राजस्थान रॉयल्स मनोज बादले ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर आनंद कृपालु यूनाइटेड स्पिरिट्स
गुजरात टाइटन्स स्टीव कोल्ट्स, डोनाल्ड मैकेंज़ीसीवीसी कैपिटल
लखनऊ सुपरजायंट्स डॉ संजीव गोयनका, आरपी संजीव गोयनका ग्रुप

आईपीएल में बड़ी-बड़ी कंपनियां पैसा लगाती हैं

आईपीएल ने इंडियन क्रिकेट में कॉर्पोरेट को आने की अनुमति प्रदान की हैं। आईपीएल शुरू होने से पहले स्‍पॉन्‍सर्स खिलाड़ियों को टीशर्ट पर कंपनी का लोगों लगाने के इतने पैसे नहीं देते थे। लेकिन अब खिलाड़ियों के शरीर पे दिखाई देने वाले छोटे छोटे कंपनी के लोगों का भी मोटा पैसा मिलता हैं।

खिलाड़ियों को अपने नाम की टीशर्ट पहनाने के लिए देश विदेश की बड़ी बड़ी कंपनिया मोटी रकम खर्च करती हैं। इसका बड़ा कारण हैं। इंडिया में दुनिया की दूसरे नंबर की सबसे ज्यादा जनसंख्या होने के कारण इंडियन मार्केट काफी बड़ा हैं। ऐसे में कंपनिया लोगों के दिमाग में अपने जगह बनाने के लिए आईपीएल को सबसे बड़ा प्लेटफ़ॉर्म मानती हैं। क्योंकि इंडिया में आईपीएल को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में आईपीएल का क्रेज होता हैं।

आईपीएल का बिजनेस मॉडल IPl Business Model Hindi

आईपीएल को बिजनेस मॉडल के रूप में डिजाइन किया गया हैं। जिसमें खिलाड़ियों से लेकर बीसीसीआई , और बड़े बड़े कॉर्पोरेट्स पर पैसों की बरसात होती हैं। लोगों के दिमाग में आईपीएल का क्रेज बढ़ाने के लिए एक दो महीने पहले विज्ञापन दिखाए जाते हैं ताकि लोगों के अंदर आईपीएल का क्रेज बना रहें।

आईपीएल बिजनेस मॉडल यह है कि प्राइवेट कंपनियों को क्रिकेट फ्रेंचाइजी खरीदने के लिए बुलाया जाए। जब फ्रेंचाइजी को बड़ी कीमत पर बेच दिया जाएगा, तब इंडियन कॉर्पोरेट्स आईपीएल में निवेश करेंगे। तभी आईपीएल में टीमों की मोटी कमाई होगी।

आईपीएल टीमें पैसे कैसे बनाती हैं।

आईपीएल में टीमों के कमाई करने के अलग अलग माध्यम होते हैं। जिनके माध्यम से टीमें अरबों रुपये कि कमाई करते हैं।

मीडिया राइट्स

आईपीएल में कमाई करने का सबसे बड़ा मॉडल मीडिया राइट्स होता हैं। जिसमें बीसीसीआई आईपीएल मैचो के प्रसारण को दिखने के लिए ब्रॉडकास्‍टर और ऑनलाइन स्‍ट्रीमर से मोटी रकम वसूल करता है। आईपीएल का लाइव प्रसारण करने वाले ब्रॉडकास्‍टर से मिलने वाली राशि में से बीसीसीआई अपनी फीस काटकर बची हुई राशि को सभी टीमों में अलग अलग बाँट देता हैं।

किस टीम को कितनी राशि मिलेगी। इसका फैसला आईपीएल होने के बाद टीम रैंक के आधार पर होता हैं। जिस टीम की रैंक जितनी अधिक होती हैं। उस टीम को उतना अधिक रेवेन्यू मिलता हैं। आईपीएल से होने वाली कमाई में टीमों को सबसे अधिक रेवेन्यू लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा मीडिया राइट्स से ही मिलता हैं।

मीडिया राइट्स कंपनिया

  • 2008 में जब आईपीएल की शुरुआत तब से अगले दस वर्षों तक यानि कि 2008 से 2018 तक IPL ब्रॉडकास्टिंग के राइट्स सोनी के पास थे। सोनी ने ये राइट्स बीसीसीआई को 8200 करोड़ रुपये देकर खरीदे थे।
  • 2018 में फिर से IPL ब्रॉडकास्टिंग के लिए बोली लगी अब ये बाजी स्टार स्पोर्ट्स के हाथ लगी। स्टार स्पोर्ट्स ने 2018 से 2022 तक यानि के चार वर्षों के IPL ब्रॉडकास्टिंग राइट्स खरीदने के लिए बीसीसीआई को 16,347 करोड़ रुपये दिए।
  • अब 2023 के आईपीएल से IPL ब्रॉडकास्टिंग के लिए बीसीसीआई बोली लगाएगा। मीडिया और स्पोर्ट्स एकपर्ट्स के की माने तो ये बोली लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक जा सकती हैं।

आईपीएल शुरू होने के बाद ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से होने वाली कमाई में से बीसीसीआई अपने पास कुल कमाई का बीस प्रतिशत हिस्सा रखता था। 80 प्रतिशत हिस्सा टीमों में बाँट दिया जाता था। लेकिन अब इसमें बदलाव हो चुका हैं। अब ये राशि 50- 50 हो गई हैं यानि कि एक तरफ बीसीसीआई और दूसरी तरफ सभी टीमें।

आईपीएल शुरू होने के पहले दस सीजनों में BCCI और टीमों ने ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों से 8,200 करोड़ रुपए कमाए थे यानि कि प्रत्येक वर्ष 820 करोड़। जबकि 2018 से अगले पांच वर्षों तक स्टार स्पोर्ट्स ने ब्रॉडकास्टिंग राइट्स 16,347 करोड़ रुपए में खरीदे थे जिससे टीमें और बीसीसीआई ने प्रत्येक वर्ष तकरीबन 3,270 करोड़ रुपए।

टाइटल स्पॉन्सरशिप

बीसीसीआई और टीमों के आईपीएल में कमाई का दूसरा सबसे बड़ा माध्यम टाइटल स्पॉन्सरशिप का होता हैं। टाइटल स्पॉन्सरशिप मतलब कि आईपीएल के नाम से पहले अपना नाम जुड़वाना

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जैसे- डीएलएफ आईपीएल, पेप्सी आईपीएल, वीवो आईपीएल और अब टाटा आईपीएल।

बड़ी बड़ी कंपनिया IPL के नाम से पहले अपना नाम जुड़वाने के लिए अरबों रुपये खर्च करती हैं। इसका बड़ा कारण हैं कि उनके ब्रांड का प्रचार बड़े स्तर पर होता हैं। लोगों को उनके ब्रांड पर विश्वास होने लगता हैं। जिससे कंपनी का कस्टमर बेस बढ़ता हैं। जिससे उसकी कमाई बढ़ती हैं। इसीलिए कंपनिया आईपीएल से पहले अपना नाम जुड़वाने के लिए बीसीसीआई को मोटी रकम देती हैं।

टाइटल स्पॉन्सरशिप कंपनिया

  • आईपीएल के पहले पाँच सीजन 2008 से 2012 तक आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सरशिप के राइट्स देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलेपर्स डीएलएफ ने 200 करोड़ रुपये में खरीदे थे।
  • 2013 से अगले पांच सीजन 2017 तक के आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के राइट्स पेप्सी ने 397 करोड़ रुपए खर्च करके खरीदे थे। लेकिन पेप्सी ने ये करार दो वर्ष पहले ही खत्म करके 2015 में आईपीएल से अलग हो गया।
  • 2016 से 2017 के आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के राइट्स चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो ने 200 करोड़ रुपये खर्च करके खरीद लिए।
  • उसके बाद वीवो ने ही आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स बरकरार रखने के लिए 2018 से 2022 तक यानी कि पाँच सीजन के राइट्स 2199 करोड़ में खरीदे
    लेकिन 2020 में इंडिया चाइना विवाद के बाद ये करार खत्म हो गया। 2020 के आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स Dream11 कंपनी ने लिए 222 करोड़ में खरीद लिए।
  • 2021 के आईपीएल में वीवो ने फिर से आईपीएल में एंट्री की उसने 439.8 करोड़ देकर आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप खरीद ली।
    अब 2022 से 2024 तक की आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप टाटा ने 600 करोड़ रुपए खर्च करके अपने पास रखी हैं।

ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप से बीसीसीआई को आईपीएल 2008 से 2017 तक तकरीबन 8400 करोड़ की कमाई हुई यानी कि हर वर्ष लगभग 840 करोड़ रुपए।

जबकि 2018 से 2022 तक बीसीसीआई को दोनों माध्यम से लगभग 18500 करोड़ रुपए की कमाई हुई यानी कि तकरीबन प्रत्येक वर्ष 3700 करोड़ रुपए।

इस कमाई में से अगर बीसीसीआई की कमाई को अलग कर दिया जाए तो आठ टीमों को प्रत्येक वर्ष 1156 करोड़ मिलें। यानि कि प्रत्येक टीम को प्रति वर्ष लगभग 230-240 करोड़ रुपये मिलें।

विज्ञापन और प्रमोशन रेवेन्यू

ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के बाद आईपीएल में टीमों की कमाई का तीसरा सबसे बड़ा माध्यम हैं विज्ञापन

जिसके जरिए भी टीमों और बीसीसीआई की जमकर कमाई होती हैं।टीमों की होने वाली कमाई का ये भी एक अच्छा बिजनेस मॉडल हैं। जिसके लिए बड़ी बड़ी कंपनिया मोटी रकम देकर करार करती हैं।

विज्ञापन के इस करार में अनेकों कंपनियां होती हैं। जिसमें विज्ञापन के तहत करार करने वाली कंपनियों के विज्ञापन ग्राउंड में अलग अलग प्रकार से दिखाई देते हैं। जैसे कि अंपायर की जर्सी, हेलमेट, विकेट , मैदान के बीच में , बाउंड्री लाइन पर

जिसके लिए विज्ञापन देने वाली कंपनियां टीमों को मोटी रकम प्रदान करती हैं। कुछ कंपनियां अलग से टीमों के साथ प्रमोशन का करार करती हैं। इसका पता आप टीमों की टी शर्ट पर कंपनी का नाम देखकर लगा सकते हो ।

एक रिपोटर्स की माने तो टीमे विज्ञापन और ब्रैंड प्रमोशन से तकरीबन प्रत्येक वर्ष लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये आसानी से कमा लेती हैं।

इसके अलावा कुछ टीमें अपने नाम वाली टी-शर्ट, कैप, ग्लब्स इत्यादि प्रोडक्ट बनाकर भी मैदान में सेल करते हैं। जिससे टीमों की अच्छी कमाई होती हैं।

लोकल रेवेन्यू

आईपीएल में कमाई का चौथा सबसे बड़ा माध्यम हैं। लोकल रिवेन्यू यानि कि मेच के बिकने वाले टिकट

एक मैच में बिकने वाली टिकट से तकरीबन पाँच से सात करोड़ रुपये तक की कमाई हो जाती हैं। जिसमे से 80 फीसदी पैसा घरेलू टीम को मिलता हैं यानि कि जिस टीम के होम ग्राउंड में मेच होता हैं। इस तरह से प्रत्येक मेच में टीमों को लगभग 3-4 करोड़ रुपए टिकट कमाई से हो जाते हैं।

प्राइज मनी

ये प्राइज मनी केवल उसी टीम को मिलती हैं जो भी टीम सभी टीमों को हराकर आईपीएल का खिताब जीतती हैं। टीमों को इनाम के रूप में दी जाने वाली ये सबसे बड़ी राशि जिसके बारें में सभी को पता होता हैं। जबकि ज्यादातर मेच देखने वाले आईपीएल से होने वाली दूसरे तरह से कमाई से बारें में अनजान होते हैं। टीम को मिलने वाली प्राइज मानी टीम मालिक और खिलाडि़यों के बीच बांटी जाती हैं।

2021 मे आईपीएल जीतने वाली टीम को 20 करोड़ रुपये दूसरे नंबर पर आने वाली टीम को 12.5 करोड़ रुपये मिले थे। जबकि नीचे की सभी टीमों को 8.75-8.75 करोड़ रुपए मिले।

आईपीएल टीमे खिलाड़ियों पर कितना पैसा खर्च करती हैं ।

  • आईपीएल टीमें हर साल अपनी टीम के खिलाड़ियों पर लगभग 90 से 100 करोड़ रुपये खिलाड़ियों की फीस पर खर्च करती हैं।
  • इसमें हर साल लगभग 35-50 करोड़ रुपए ऑपरेशन कास्ट के होते हैं। जिसमें खिलाड़ियों के आने जाने के लिए फ्लाइट ,बस खर्च , होटल में रुकने का खर्च इत्यादि शामिल हैं।
  • अगर इन दोनों खर्च को मिला दिया जाए तो प्रत्येक टीम हर वर्ष अपनी टीम के खिलाड़ियों पर 140 से 150 करोड़ रुपये खर्च करती हैं।
  • टीमों को मैच आयोजन करने वाली समिति को 50 लाख रुपए स्टेट एसोसिएशन को देना होता हैं यानी कि एक सीजन के सात मैचों के लिए तकरीबन 3.50 करोड़ रुपये देने होते हैं।
  • इन सब के बाद भी टीमों को अपनी कमाई में से बीस फीसदी हिस्सा बीसीसीआई को देना होता हैं। जोकि टीमों की कमाई के हिसाब से तकरीबन 25-30 करोड़ रुपये होता हैं।

IPL टीमों को हर साल कितना फायदा होता है

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अब अगर हम आईपीएल टीमों को हर साल मिलने वाली 300 करोड़ की कमाई मे से 160 से 165 करोड़ रुपये खर्च के भी निकाल दे तक सभी टीमों की एक वर्ष की कमाई लगभग 140 से 150 करोड़ रुपये तक हो जाती हैं । यही कारण है कि आईपीएल हारने वाली टीमों को नुकसान नही होता हैं। इसलिए वे एक बार भी आईपीएल का खिताब न जीत पाने के कारण अभी तक आईपीएल में बनी हुई हैं।

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